खुशखबरी: भारत में बन गई कोरोना की दवा, अगले हफ्ते तक बाजार में बिकने भी लगेगी!

कोरोना वायरस महामारी के अंधेरे के बीच भारत की एक दवा कंपनी ने उम्मीद का दिया जला दिया है। दुनिया की दवा कंपनियांको पीछे छोड़ते हुए भारत की एक दवा कंपनी ने कोरोना वायरस का काम तमाम करने वाली दवा तैयार कर ली है और अगर सबकुछ सही रहा तो ये दवा कोरोना के मरीजों के लिए रामबाण बन सकती है।
पूरी दुनिया जब कोरोना वायरस के कहर से कराह रही है और इस महामारी से मुक्ति की दवा बनाने की जद्दोज़हद कर रही है। भारत ने इस बीमारी की दवा ढूंढ निकाली है। मुंबई की मेडिसिन कंपनी ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स ने इसकी दवा को बाजार में उतारने की घोषणा कर दी है। कपंनी ने कोविड-19 से मामूली रूप से पीड़ित मरीजों के इलाज के लिए एंटीवायरल दवा फेविपिराविर को फैबिफ्लू ब्रांड नाम से पेश किया है।

भारत ने बना ली कोरोना की दवा !

जिस कंपनी ने कोरोना से जंग में भारत को ये कामयाबी दिलाई है। उसका नाम ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स है। महाराष्ट्र की इस दवा कंपनी का दावा है कि फेविपिरविर कोरोना वायरस के इलाज की पहले ऐसी खाने वाली दवा है, जो स्वीकृत है और सस्ती भी। बाजार में इसके एक टैबलेट की कीमत महज 103 रुपये होगी।
फैबिफ्लू भारत में कोरोना वायरस के इलाज की पहली ऐसी खाने वाली दवा है जिसे सरकार की मंजूरी हासिल है। कंपनी के मुताबिक भारतीय औषधि महानियंत्रक यानी डीजीसीआई ने इस दवा की मार्केटिंग को मंजूरी दे दी है और अगले हफ्ते तक ये एंटीवायरल दवा बाज़ार में आसानी से उपलब्ध हो जाएगी और इसके एक टैबलेट की कीमत सिर्फ 103 रुपये होगी। फैबिफ्लू ब्रांड के नाम से बाजार में आने वाली दवा फेविपिरविर टैबलेट की शक्ल में होगी। दवा बनाने वाली कंपनी ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स के मुताबिक इसकी कीमत सिर्फ 103 रुपये होगी।

फेविपिरविर फैबिफ्लू की कीमत 

  • एक टैबलेट की कीमत सिर्फ 103 रुपये होगी।
  • इसकी एक स्ट्रिप में 34 टैबलेट होंगे।
  • एक स्ट्रिप की अधिकतम खुदरा कीमत 3,500 रुपये होगी।
  • टैबलेट 200 मिलीग्राम के रूप में उपबल्ध होगी।
    ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक ग्लेन सल्दान्हा ने कहा कि यह मंजूरी ऐसे समय मिली है, जबकि भारत में कोरोना वायरस के मामले पहले की तुलना में अधिक तेजी से बढ़ रहे हैं। इससे हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली काफी दबाव में है। उन्होंने उम्मीद जताई कि फैबिफ्लू जैसे प्रभावी इलाज की उपलब्धता से इस दबाव को काफी हद तक कम करने में मदद मिलेगी।
    फैबिफ्लू कोविड-19 के के इलाज के लिए भारत में पहली ऐसी दवा है जो खाने वाली टैबलेट के रूप में आ रही है। भारतीय औषधि महानियंत्रक यानी डीजीसीआई ने इसकी मार्केटिंग को मंजूरी देने के साथ ही दवा की खुराक भी तय कर दी है। सिफारिश के मुताबिक पहले दिन इसकी 1800 एमजी की दो खुराक लेनी होगी। उसके बाद 14 दिन तक 800 एमजी की दो खुराक लेनी होगी।
ग्लेनमार्क फार्मास्युटिकल्स अपनी एंटी वायरल दवा फेविपिरविर फैबिफ्लू टैबलेट के लिेए एक्टिव फार्मास्युटिकल इन्ग्रिडिएंट का उत्पादन अंकलेश्वर संयंत्र में कर रही है। जबकि फार्मूलेशन का उत्पादन हिमाचल प्रदेश के बद्दी संयंत्र में हो रहा है। ग्लेनमार्क का दावा है कि यह दवा अस्पतालों के साथ साथ दवा की खुदरा दुकानों पर भी उपलब्ध होगी। ग्लेनमार्क के अधिकारियों के मुताबिक कंपनी ने अपने इन-हाउस रिसर्च एंड डेवलपमेंट टीम के जरिए फैबिफ्लू के लिए सक्रिय फार्मास्युटिकल इंग्रीडिएंट और फॉ र्म्युलेशन को विकसित किया है। कंपनी प्रति मरीज न्यूनतम दो पत्ते की जरूरत के हिसाब से पहले महीने में ही 82,500 मरीजों के लिए फैबिफ्लू उपलब्ध करा पाएगी और मांग बढ़ने पर वो इसका उत्पादन और ज्यादा बढ़ा सकती है।
ग्लेनमार्क कंपनी ने पिछले महीने ही यह ऐलान किया था कि वह दो एंटी-वायरल फेविपिराविर और उमिफेनोविर का क्लिनिकल टेस्ट कर रहा है। कंपनी ने बताया था कि इन दोनों ऐंटी-वायरल्स का संयोजन कोरोना के सामान्य मरीजों के इलाज में कारगर साबित होगा। ऐसे में कंपनी की यह दवा मरीज को कोरोना के संक्रमण को घातक होने से रोकेगी। इस दवा के क्लिनिकल ट्रायल के नतीजे काफी बेहतर थे। लिहाजा भारत सरकार ने भी इस दवा की मार्केटिंग को मंजूरी दे दी है।
ग्लेनमार्क कंपनी का दावा है कि ये दवा कोरोना वायरस का काम तमाम करने का माद्दा रखती है लेकिन डीजीसीआई ने साफ कर दिया है कि ये दवा सिर्फ उन्हीं मरीजों को दी जा सकती है जिसमें इस महामारी के हल्के लक्षण दिखाई देंगे। अगर मरीज की हालत गंभीर है तो इस दवा का इस्तेमाल कतई न किया जाए।
भारत में फिलहाल रोजाना 15 हजार से ज्यादा कोरोना वायरस के मरीज सामने आ रहे हैं जिनमें तकरीबन 9 हजार ऐसे होते हैं जिनमें इसके हल्के लक्षण होते हैं। ऐसे इस दवा को बनाने वाली कंपनी को फिलहाल सिर्फ भारत में ही रोजाना 9 हजार मरीज मिल सकते हैं और इस 9 हजार ग्राहक के लिए दूसरी कंपनिया भी इस दवा को बनाने के लिए आगे आ सकती है।
कोरोना महामारी की इस कारगर दवा की मार्केटिंग से ग्लेनमार्क कंपनी अपने बुरे दिनों से पीछा छुड़ाने की उम्मीद पाले हुए है। जानकारी के मुताबिक मार्च तिमाही के अंत तक कंपनी पर 3600 करोड़ रुपये का कर्ज था। कंपनी को उम्मीद है कि इस दवा के जरिए उसकी वित्तीय हालत में सुधार होगा। क्योंकि दवा से कारगर इलाज होने पर विदेशी बाजारों में भी इसकी मांग बढ़ जाएगी।
ग्लेनमार्क कंपनी का कहना है कि फिलहाव वो इस दवा की आपूर्ति के लिए अस्पतालों के साथ गठजोड़ पर विचार नहीं कर रही है। क्योंकि उसका पहला फोकस दवा को अगले हफ्ते तक बाजार में उपलब्ध कराना है लेकिन अगर जरूरत पड़ी तो कंपनी सरकारी और निजी स्वास्थ्य सेवा को समर्थन देने से बिल्कुल पीछे नहीं हटेगी।
खुशखबरी: भारत में बन गई कोरोना की दवा, अगले हफ्ते तक बाजार में बिकने भी लगेगी! खुशखबरी: भारत में बन गई कोरोना की दवा, अगले हफ्ते तक बाजार में बिकने भी लगेगी! Reviewed by kumar on 8:15 AM Rating: 5
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