आज हम आपको एक ऐसी लड़की के बारे में बताएंगे जिसने पढ़ाई करी, ग्रेजुएशन करा फिर नौकरी करने की सोची और अंत में अब साध्वी बन गई। बता दें कि लकड़ी एक अच्छे घर से ताल्लुक रखती थी जो पूरी तरह से सम्पन्न था। किसी चीज की कोई कमी नहीं थी किन्तु इसके बावजूद भी उसने सबकुछ छोड़कर भगवान की शरण में जाना चाहा और अध्यात्म ग्रहण कर लिया।
ये मामला हैं इंदौर का जहां पर बास्केटबॉल कॉम्प्लेक्स में मुमुक्षु सिमरन जैन का दीक्षा महोत्सव हुआ। बता दें कि सिमरन की उम्र 23 वर्ष हैं और इस उम्र में ही उन्होंने सांसारिक सुखों को त्यागकर साध्वी का जिंदगी जीने का निर्णय लिया है। सिमरन की दीक्षांत समारोह श्री वर्धमान श्वेतांबर स्थानकवासी जैन श्रावक संघ ट्रस्ट के तत्वावधान में हुआ। दीक्षा लेने से पूर्व उन्होंने अपना पूरा दिन परिजनों के साथ बिताया, हाथों में मेंहदी लगाई, सोलह श्रंगार किए और फिर अपनी मनपसंद भोजन किया।
दीक्षा लेने से पहले उन्होंने सांसारिक वस्तुओं को त्याग दिया, सबसे पूर्व उन्होंने अपने सभी जेवर अपनी मां को दे दिए और फिर अपने बालों का भी त्याग कर दिया। दीक्षा से पहले सिमरन ने कहा, “सांसारिक बुआ डॉ. मुक्ताश्री की राह पर ही आत्मिक सुकून और परमात्मा की प्राप्ति हो सकती है, इसलिए वैराग्य धारण कर रही हूं.”
साध्वी बनने के उन्होंने कहा, “मैं देशभर के कई सुंदर जगहों पर घूमी और वहां वक्त बिताया किन्तु मुझे आराम नहीं मिला. जब मैं गुरुजनों के सानिध्य में आई तब जाकर सुकुन की प्राप्ति हुई. मुझे चकाचौंध भरी जीवन रास नहीं आई. यहां लोग जरूरत से ज्यादा प्रयोग करते हैं जो सही नहीं है.
23 वर्ष की सिमरन बन सकती थी इंजीनियर, मनपसंद आखिरी खाना खा कर बन गयी साध्वी
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