विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 14 जून को दुनिया रक्तदान दिवस घोषित किया है. यह कईतरह के ब्लड ग्रुप का पता लगाने वाले वैज्ञानिक डाक्टर कार्ल लैंडस्टीनर के
सम्मान में मनाया जाता है. अक्सर लोगों लगता है कि ब्लड डोनेट करके हम दूसरों की जान बचाते हैं जबकि हकीकत ये भी है कि इस बहाने डोनर की स्वास्थ्य भी सुधरती है. हमारे मन के ब्लड डोनेशन से जुड़े कई भ्रम आते हैं जैसे ब्लड डोनेशन के बाद मैं कोई कार्य नहीं कर सकता, दवा ले रहा हूं इसलिए रक्तदान नहीं कर सकता है. डाक्टर लीना हूडा, ब्लड ट्रांसफ्यूजन स्पेशलिस्ट और मेडिकल ऑन्कोलॉजिस्ट, एसएमएस हॉस्पिटल, जयपुरबता रहीं है ब्लड डोनेशन से जुड़े भ्रम-तथ्यों व रक्तदान करते समय किन बातों का ख्याल रखना चाहिए
- डोनर की आयु 18-65 साल के बीच होनी चाहिए व वजन 48 किलो से कम नहीं होना चाहिए. रक्तदान से पहले भोजन जरूर कर लें.
- प्रेग्नेंसी व माहवारी के दौरान महिलाएं ब्लड डोनेट करने से बचें. इसके अतिरिक्त बच्चे को ब्रेस्ट फीडिंग कराती हैं तो रक्तदान न करें.
- अगर रक्तदान के दौरान उल्टी लगने, सर्दी लगने, खांसी आने, सिरदर्द, चक्कर व घबराहट जैसे लक्षण दिखें तो चिकित्सक को बताएं.
- रक्तदान के बाद जहां से ब्लड निकाला गया है वहां से ब्लीडिंग बंद न हो तो कोहनी को मोड़कर रखें व तब तक रखें जब तक ब्लड निकलना बंद न हो जाए.
- रक्तदान के बाद अगर प्रभावित हिस्से पर सूजन आती है या नीला पड़ जाता है व ठंडा सेंक करें.
- रक्तदान से पहले नींद पूरी लें. अगर रातभर ट्रेवल किया है तो अगले दिन रक्तदान न करें.
ब्लड डोनेट करने से पहले जान ले ये खास बातो के बारे में
Reviewed by kumar
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5:11 AM
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