भारतीय कैप्टन विराट कोहली (Virat Kohli) व महेंद्र सिंह धोनी (Mahendra Singh Dhoni) ने देश को बड़ी कामयाबियां दिलाई हैं। पहले बतौर खिलाड़ी व फिर बतौर कैप्टन दोनों टीम को नयी ऊंचाइयों पर लेकर गए हैं।
सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं संसार भर में उनके चाहने वाले हैं उपस्थित हैं। खेल की संसार में राज करने वाले खिलाड़ी पढ़ाई में औसत थे। जहां धोनी (MS Dhoni) ने अपने पिता के दबाव में 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की वहीं कोहली स्कूल ड्रॉप करना चाहते थे लेकिन उन्हें भी 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करनी पड़ी।
पहली डिविजन में पास हुए थे धोनी
साल 2016 में आई धोनी की बायोपिक फिल्म में दिखाया गया था कि किस तरह धोनी पढ़ाई व क्रिकेट में तालमेल बिठाने की प्रयास में लगे रहते थे। उनके पिता धोनी की पढ़ाई को लेकर बहुत ज्यादा कठोर थे। यही वजह थी कि 10वीं के बोर्ड एग्जाम में उनके 66 फीसदी अंक आए थे। 12वीं कक्षा के दौरान वह रांची के बाहर मैच खेलने जाया करते थे फिर भी उन्होंने किसी तरह 56 फीसदी अंकों के साथ 12वीं की इम्तिहान पास की।
कोहली के लिए बुरा सपना था गणित
बात करें मौजूदा भारतीय कैप्टन विराट कोहली (Virat Kohli) के लिए तो पढ़ाई खासकर गणित बुरे सपने जैसा था। जितना कोहली को क्रिकेट से लगाव था उतनी ही पढ़ाई से नफरत। कोहली ने पिछले वर्ष एक साक्षात्कार में बताया था कि उन्हें गणित में 100 में से तीन नंबर आते थे वह कभी दहाई का भी आंकड़ा पार नहीं कर सके। उन्हें गणित के फॉर्मूले कभी समझ नहीं आए।
10वीं फेल हैं सचिन तेंदुलक
कोहली को क्रिकेट से भी ज्यादा गणित कठिन लगता था। उन्होंने बताया था कि वह खींच तानकर बड़ी ही कठिन से 10वीं पास हुए थे जिसके लिए उन्होंने बहुत मेहनत की थी। वह मेहनत सिर्फ इसलिए थी क्योंकि वह गणित से पीछा छुड़ाना चाहते थे। इन दोनों की ही लीग में हिंदुस्तान के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) भी शामिल हैं। 16 वर्ष की आयु में डेब्यू करने वाले सचिन 10वीं फेल हैं। सचिन क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान लगाने के कारण फेल हो गए व इसके बाद उन्होंने दोबारा इम्तिहान भी नहीं दी।
Topic: #विराट कोहली #virat kohli #गणित #mahendra singh dhoni
सिर्फ हिंदुस्तान में ही नहीं संसार भर में उनके चाहने वाले हैं उपस्थित हैं। खेल की संसार में राज करने वाले खिलाड़ी पढ़ाई में औसत थे। जहां धोनी (MS Dhoni) ने अपने पिता के दबाव में 12वीं तक की पढ़ाई पूरी की वहीं कोहली स्कूल ड्रॉप करना चाहते थे लेकिन उन्हें भी 12वीं तक की पढ़ाई पूरी करनी पड़ी।
पहली डिविजन में पास हुए थे धोनी
साल 2016 में आई धोनी की बायोपिक फिल्म में दिखाया गया था कि किस तरह धोनी पढ़ाई व क्रिकेट में तालमेल बिठाने की प्रयास में लगे रहते थे। उनके पिता धोनी की पढ़ाई को लेकर बहुत ज्यादा कठोर थे। यही वजह थी कि 10वीं के बोर्ड एग्जाम में उनके 66 फीसदी अंक आए थे। 12वीं कक्षा के दौरान वह रांची के बाहर मैच खेलने जाया करते थे फिर भी उन्होंने किसी तरह 56 फीसदी अंकों के साथ 12वीं की इम्तिहान पास की।
कोहली के लिए बुरा सपना था गणित
बात करें मौजूदा भारतीय कैप्टन विराट कोहली (Virat Kohli) के लिए तो पढ़ाई खासकर गणित बुरे सपने जैसा था। जितना कोहली को क्रिकेट से लगाव था उतनी ही पढ़ाई से नफरत। कोहली ने पिछले वर्ष एक साक्षात्कार में बताया था कि उन्हें गणित में 100 में से तीन नंबर आते थे वह कभी दहाई का भी आंकड़ा पार नहीं कर सके। उन्हें गणित के फॉर्मूले कभी समझ नहीं आए।
10वीं फेल हैं सचिन तेंदुलक
कोहली को क्रिकेट से भी ज्यादा गणित कठिन लगता था। उन्होंने बताया था कि वह खींच तानकर बड़ी ही कठिन से 10वीं पास हुए थे जिसके लिए उन्होंने बहुत मेहनत की थी। वह मेहनत सिर्फ इसलिए थी क्योंकि वह गणित से पीछा छुड़ाना चाहते थे। इन दोनों की ही लीग में हिंदुस्तान के महान बल्लेबाज सचिन तेंदुलकर (Sachin Tendulkar) भी शामिल हैं। 16 वर्ष की आयु में डेब्यू करने वाले सचिन 10वीं फेल हैं। सचिन क्रिकेट पर ज्यादा ध्यान लगाने के कारण फेल हो गए व इसके बाद उन्होंने दोबारा इम्तिहान भी नहीं दी।
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10वीं फेल हैं ये भारतीय खिलाड़ी, ये सब्जेक्ट लगता था बहुत कठिन
Reviewed by kumar
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4:34 AM
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