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ईश्वर यानी भगवान ने अपने अंश में से पांच तत्व-भूमि, गगन, वायु, अग्नि और जल का समावेश कर मानव देह की रचना की और उसे सम्पूर्ण योग्यताएं और शक्तियां देकर इस संसार में जीवन बिताने के लिये भेजा है। मनुष्य, ईश्वर की अनुपम कृति है, इसलिए उसमें ईश्वरीय गुण आनन्द व शांति आदि तो होने ही चाहिये जिससे वह ईश्वर (भगवान) को हमेशा याद रखे!
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आपको जो भी चीज अपनी ओर खींचती है, उन सबमें आग की विशेषताएं होती हैं। यह किसी की आवाज, नैन-नक्श भी हो सकती है आैर बाद में यही प्रेम या सम्मोहन का रूप लेती है। इसकी प्रकृति ऊष्ण, गुण गरम आैर प्रसार है। इसके ग्रह सूर्य आैर मंगल हैं। अग्नि की आकृति त्रिकोण है। तीखे किनारे का मतलब ही अग्नि से है। लाल, नारंगी आैर कभी-कभार बैंगनी इसके मुख्य रंग हैं!
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यदि किसी भी तत्व के बीच किसी प्रकार का कोई असंतुलन है, तो यह इन समस्याओं का कारण बन सकता है और इन समस्याओं को हल करने का एकमात्र तरीका तत्वों को संतुलित करना है!
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हाथों की 10 अँगुलियों से विशेष प्रकार की आकृतियाँ बनाना ही हस्त मुद्रा कही गई है। हाथों की सारी अँगुलियों में पाँचों तत्व मौजूद होते हैं जैसे अँगूठे में अग्नि तत्व, तर्जनी अँगुली में वायु तत्व, मध्यमा अँगुली में आकाश तत्व, अनामिका अँगुली में पृथ्वी तत्व और कनिष्का अँगुली में जल तत्व!
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जानिए शरीर के मूलभूत पंचतत्व के फायदे व उपयोग
Reviewed by Admin
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10:24 AM
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