हलुवे से ज्यादा कुछ भी आसान नही है
देसी घी का हलुवा सबसे पौष्टिक और सबसे सुरक्षित है और इतना पौष्टिक कि यदि कोई मरीज अभी घंटे पहले ऑपरेशन करवा कर भी आया हो तो उसे ही हलवा दे सकते हैं. उस पेशेंट को रोटी या दाल नही खिलाई जा सकती. कम से कम 15 दिन तक चावल भी नही खिलाया जा सकता. कोई भी पेशेंट हो ऑपरेशन के बाद अगर हलुवा खिला दें तो हीलिंग में बहुत मदद मिलेगी.
हलुवा ही ऐसा पोष्टिक भोजन है जो 5 मिनट में बन सकता है और वो ही आजकल धीरे धीरे विलुप्त हो रहा है. और उसकी जगह पावरोटी आ गयी, डबल रोटी आ गयी, घर में नुडल्स आ गये, और सुबेरे के ही नास्ते में ये सब आ गयी है और आयुर्वेद कहता है कि सुबेरे के नाश्ता ही सबसे ज्यादा मजबूत होना चाहिए. और उसी में हम पाव रोटी डबल रोटी बच्चों को खिला रहे है.
कभी कभी तो आप ही बहाना बना देते है कि सुबह बच्चे खाना खाते नही हैं. आपने आदत ही नही डाली तो क्यूँ खायेंगे वो, और यहीं से हमारी जिंदगी की गड़बड़ी शुरू हो रही है. और ये सड़े हुए मैदे की पावरोटी डबल रोटी आप जितनी खायेंगे कब्जियत उतनी ही बढ़ेगी. और कब्जियत बढ़ेगी तो शरीर की बीमारी बढ़ेगी. 103 बीमारियाँ होती है अकेले पेट ख़राब होने से ये बात हमेशा ध्यान रखिये.
इस एक रोग को खत्म करने से 80% रोग अपने आप चले जाएंगे.
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