आपको बता दें कि घरेलू क्रिकेट में वसीम जाफर को एक महान क्रिकेटर माना जाता है और माना भी क्यों न जाए क्योंकि लगभग वह हर साल अपनी ही टीम को रणजी ट्रॉफी में जीत दिलाते हैं.
लेकिन आज इस आर्टिकल में जानेंगे कि ऐसा क्या हुआ कि इतने महान बल्लेबाज को भारतीय टीम अपनी जगह पक्की करने के लिए काफी मशक्कत झेलनी पड़ी और अंत में वह असफल रहे।
बचपन मे ही अज़हरुद्दीन से होने लगी थी तुलना
आपको बता दें कि 1987 में वसीम जाफर का जन्म हुआ था और जब वह 15 साल की उम्र में मुंबई के लिए अंडर 15 टूर्नामेंट खेल रहे थे तब उनकी तुलना अजहरुद्दीन से की जा रहे थे.
घुटनें में चोट से क्रिकेट करियर पर आया खतरा
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साल 2006 में वसीम जाफर को घुटने में चोट लगने की वज़ह से इंग्लैंड में जारी मैच को छोड़कर वापस भारत आना पड़ा था। इस चोट के कारण जाफर का क्रिकेट करियर भी संकट में आ गया। साल 2008 में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में उनका प्रदर्शन निरशाजनक रहा। इसके बाद श्रीलंका के खिलाफ भारत की अगली टेस्ट सीरीज में उनकी जगह गौतम गंभीर को शामिल किया गया था। इसके बाद सहवाग-गंभीर की जोड़ी भारत के लिए टेस्ट में लगातार अच्छा प्रदर्शन करती रही,जिससे वसीम जाफर के लिए वापसी के दरवाजे भी बंद हो गए।
परिवार में हैं और भी क्रिकेटर
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दोस्तों हम आपको बता दें कि वसीम जाफर के भतीजे अरमान जाफर भी भारतीय अंडर-19 टीम का हिस्सा है और वह भविष्य भारतीय टीम के लिए खेलते हुए देख सकते हैं.
ये महान बल्लेबाज बन सकता था भारतीय इतिहास का सबसे बड़ा ओपनर, लेकिन किस्मत ने दिया ऐसा धोखा
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6:29 AM
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